तो मिल सकती है कॉलेज में 17 लाख टीचर्स को नौकरी…

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कालेजों में योग्य टीचर्स की कमी: शिक्षा किसी भी देश के विकास की पहली नींव होती है, ऐसे में अगर शिक्षा को मजबूत बनाना है, तो सबसे पहले शिक्षकों की स्थिति में सुधार करना होगा, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण भारत देश में शिक्षक और छात्रों के बीच बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। इसे आप बेरोजगारी का नाम दे सकते हैं, तो शिक्षा का राजनीतिकरण भी कह सकते है…जी हां, इन्ही तमाम सवालों से जूझता हुआ पढ़िए ये ब्लॉग…

एआईएसएचई(अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण) के रिपोर्ट- 2015- 16 केअनुसार, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नियमित तौर पर पढ़ाई कर रहे छात्रों और  कार्यरत अध्यापकों का अनुपात 21:1है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस बाबत उच्चशिक्षा में सुधार लाने के लिए काबिल शिक्षकों ( जैसे- सहायक प्रोफेसर) की भर्ती के लिए कठिन परिश्रम कर रहा है, लेकिन आधार लिंकिंग के माध्यम से 1.3 लाख ऐसे शिक्षक का पता चला जो वर्तमान समय में कार्यरत नहीं हैं, जिसके बाद आकड़े और भी भयावह हो जाते हैं। आइये इस विश्लेषण से, यह जानने  की कोशिश करते हैं कि वर्तमान में उच्चशिक्षा के क्षेत्र में कितने शिक्षक कार्यरत हैं साथ ही कितने प्रोफेसर्स की और जरूरत हैं?

कालेजों में योग्य टीचर्स की कमी

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्धारित मानकों पर ध्यान दें तो उच्चशिक्षा के क्षेत्र में प्रति 10 विद्यार्थी पर एक प्रोफेसर ( यानि छात्र: प्रोफेसर- 10:1) अनिवार्य रूप से होना चाहिए। यदि भारत सरकार चाहती है कि हमारे शिक्षण संस्थानों में ये आदर्श स्थिति नजर आये तो उसके लिए भारत सरकार को तत्काल प्रभाव से 16.7 लाख सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति करनी होगी। बहुत से लोगों का कहना है कि यह असम्भव सा दिखने वाला लक्ष्य प्रतीत होता है। हम अगर इस लक्ष्य की बात भी न करें  और कहें कि 10 विद्यार्थियों पर एक प्रोफेसर न रख 15 विद्यार्थियों पर एक प्रोफेसर हो तो भी 6.9 लाख नये प्रोफेसर्स की नियुक्ति की जरूरत है। इस बात को चार्ट के प्रयोग द्वारा स्पष्ट रूप में आसानी से समझा जा सकता है।

यदि इसी तरह सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी रही, बजाय कोई ठोस कदम उठाने के तो आगामी 10 के बाद यानी 2028 तक स्थिति और भी बद से बदत्तर हो जायेगी। क्योंकि 2028 तक उच्चशिक्ष प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की संख्या आज के तुलना में लगभग 20% बढ़ चुकने के साथ ही साथ वर्तमान में कार्यरत प्रोफेसर्स में से लगभग 30% प्रोफेसर्स सेवानिवृत हो चुके होगें। ऐसे हालात में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानक 10: 1(छात्र: शिक्षक) तक पहुंचने के लिए 26.39 लाख नये शिक्षकों की भर्ती की आवश्यकता होगी। इन आकड़ों के आधार पर छात्र और शिक्षक अनुपात 15:1 के लिए करीब 14.53 लाख अध्यापकों की आवश्यकता होगी।

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सम्भव है? क्या हमारे पास माँग और मानक रूप में योग्य इतने शिक्षक होगें? लेकिन अगर वर्तमान हालातों को देखकर तो ऐसा किसी भी तरह से सम्भव होता दिखाई नहीं दे रहा है। परास्नातक के साथ-साथ नेट और पीएचडी ये है विश्वविद्यालय अध्यापक बनने के मानक अर्हताएं। नए संशोधित नियमों के अनुसार यदि हम पीएचडी की अनिवार्यता को तवज्जो न दें तो भी लगभग 50% प्रोफेसर्स के खाली पद ही भरें जा सकते हैं। लेकिन इसके बाद भी निर्धारित मानक 1: 10 तक पँहुचने लिए 8.35 लाख पीएचडी की आवश्यकता होगी।

वर्तमान में प्रतिवर्ष 25 हजार के लगभग पीएचडी भारतीय विश्वविद्यालयों से निकल रहें हैं। इसके अनुसार अगर जरूरतों को देंखें तो 2028 तक 13.195 लाख अतिरिक्त पीएचडी धारकों की आवश्यकता होगी। तभी हम मानक अनुपात 1: 10 के लक्ष्य तक पहुँच पायेंगे। लेकिन मौजूदा पाएचडी दर के अनुसार 2028 तक मात्र 2.5 लाख पीएचडी धारक होगें।इन 10.7 लाख अतिरिक्त पीएचडी धारक की पूर्ति के लिए सरकार द्वारा भारी मात्रा में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार देखें तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान से तीन गुना ज्यादा जीडीपी प्रतिशत का निवेश करना होगा। यह एक कठिन काम जरूर है लेकिन इसके बिना भारतीय उच्चशिक्षा की दशा-दिशा सुधरने वाली नहीं है। ये और कठिन इसलिए हो जाता क्योंकि यहाँ आर्थिक निवेश से अधिक परिवर्तनकारी राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।

मुझे पूरी आशा है कि इस रिपोर्ट के बाद भारत सरकार ही नहीं अपितु राज्य सरकारें और निजी शिक्षण संस्थानें भी स्थिति की गम्भीरता को समझने के साथ ही इसके लिए अपने निजी और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर कोई बड़ा फैसला लेगी। जी हां, यदि ऐसा होता है तब ही ‘पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया’ का वास्तविक मकसद पूरा हो पायेगा, वरना अन्य योजनाओं की तरह ही यह भी कागजी लीपापोती तक ही सिमटकर रह जायेगा।

नोट: इस लेख को लेखक की अनुमति से हिन्दी में अनुवाद किया गया है, जिसका मूल रूप आप यहां पढ़ सकते हैं-India need additional 17lac qualified teachers in Higher Education: Depth Analysis

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