उन्नाव गैंगरेप मामलें में सोशल मीडिया पर आक्रोश ‘भाजपा भगाओ-बेटी बचाओ’

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उन्नाव गैंगरेप मामलें

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे से बेटियों की सुरक्षा का दावा करने वाली बीजेपी सरकार इन दिन आलोचनाओं में घिरी हुई है। जी हां, देश प्रदेश में महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध ने बीजेपी पर सीधे सीधे सवाल खड़ा कर रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश का है। यूपी में बीजेपी विधायक पर रेप का आरोप है, लेकिन अभी तक पुलिस आरोपी विधायक को गिरफ्तार नहीं कर पाई है, जिसकी वजह से सूबे की कानून व्यवस्था को एनकाउंटर से दुरूस्त करने वाली योगी सरकार की पोल खुलती हुई नजर आ रही है। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

उन्नाव गैंगरेप मामले को लेकर एक तरफ योगी सरकार कड़ी कार्रवाई की दिलासा दे रही है, तो वहीं दूसरी तरफ रेप का मुख्य आरोपी खुलेआम अटपटे बयान देता हुआ नजर आ रहा है, ऐसे में यहां बीजेपी की मंशा पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या बीजेपी आरोपी विधायक को बचा रही है? क्या सरकार जिस नारे की वजह से अपनी पीठ थपथपा रही है वो भी क्या सिर्फ जुमला है? क्या बेटियों को इंसाफ दिलाने वाली सरकार अपने आरोपी विधायक के दवाब में है?

बताते चलें कि आरोपी विधायक कुलदीप सिंह ने बयान दिया कि मुझे फसाया जा रहा है, ये लोग निम्न लोग है, जिसे लोगों ने बहकाया है, ऐसे में इस तरह के बयान वालों को बीजेपी क्यों बचा रही है? बता दें कि पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो जाना भी इस सरकार को हिला कर रख देता है। इस दौरान इस मामले में काफी सियासत भी देखने को मिल रही है, तो वहीं दूसरी सोशल मीडिया पर लोगोंं का गुस्सा फूट रहा है।

विपक्ष लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेर रही है। विपक्ष और सरकार के बीच तो घिराव चलता ही रहता है, लेकिन सवाल ये है कि न्याय की गुहार कर रही पीड़िता को इंसाफ कब? क्या योगी सरकार न्याय के नाम पर दिलासा ही देती रहेगी?

आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए सरकार को निकम्मा कहा। दरअसल, लोगों में गुस्सा इस बात को लेकर है कि पीड़िता को इतने दिनों बाद भी इंसाफ नहीं मिल पाया औऱ कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने आरोपी विधायक के भाई को गिरफ्तार किया, तो वहीं पीड़िता की मांग है कि आरोपी विधायक को भी गिरफ्तार किया जाए।

सरकार चाहे जो भी हो लेकिन आजादी के इतने सालों बाद सिर्फ बेटियों की सुरक्षा को  लेकर वोट ही मांगा है, जब सुरक्षा की बात आती है, तो सरकार अपने हाथ पीछे खींच लेती है। क्या राजनीति पार्टियो को बेटियों की सुरक्षा तब तक ही याद रहती है, जब तक चुनाव रहते हैं, अगर नहीं तो आरोपी विधायक पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।

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