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राहुल की छापेमार राजनीति से उड़ी शाह-मोदी की रातों की नींद

कांग्रेस की खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने के लिए राहुल ने अब छापेमार राजनीति की शुरूआत की है। जी हां, राहुल की एक आवाज पर इंडिया गेट में भारी संख्या में युवा पहुंच गये। बता दें कि राहुल के इस प्लान के बारे में पहले से किसी को भनक तक नहीं थी, यही वजह है कि यह प्लान बिना किसी राजनीति आरोपों के सफल हुआ। आइये जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

बीती रात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंडिया गेट पर मिडइनाइट मार्च निकाला, जिसकी वजह से उन्हें युवाओं का काफी समर्थन भी मिला। जी हां, राहुल ने मिडनाइट मार्च निकालने से पहले एक ट्वीट किया था, बस राहुल के इस ट्वीट से इंडिया गेट पर भारी जनसैलाब देखने को मिला। दरअसल, यह मार्च उन्नाव और कठुआ गैंगरेप को लेकर था, इसमें कांग्रेसी समेत तमाम आम लोग भी दिखाई दिये थे।

राहुल की छापेमार राजनीति

बताते चलें कि राहुल गांधी ने उन्नाव और कठुआ मामले को लेकर गुस्साएं लोगों को अपनी आवाज दी, जोकि बतौर नेता उनका मास्टरप्लान रहा। इतना ही नहीं राहुल के इस मार्च में उनकी बहन प्रिंयका भी शामिल थी। राहुल ने ट्वीट किया कि इन सब घटनाओं से मेरा दिल दुख रहा है, आइये इस शांति की मार्च में शामिल होते हैं।


ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब राहुल गांधी ने मुद्दो को लेकर अपनी एक अलग राय रखी है। इससे पहले जेएनयू, रोहित वेमुल्ला, एससी एसटी एक्ट और पेपर लीक मामले में भी राहुल गांधी बीजेपी को चौंका चुके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी के ये कदम कांग्रेस की सियासी तस्वीर बदलने में सफल रहेगी। जी हां, कांग्रेस की छवि को सुधारने के लिए अब राहुल गांधी लोगों के बीच जाने से भी नहीं कतराते हैं।

 राहुल की छापेमार राजनीति, गुस्साएं लोगों की आवाज बने

देशभर में उन्नाव और कठुआ मामले को लेकर गुस्सा देखने को मिल रहा है, ऐसे में बीती रात राहुल गांधी गुस्साएं लोगों की आवाज बने। जी हां, राहुल गांधी ने इंडिया गेट से कहा कि अब दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही पीएम मोदी को ललकारते हुए कहा कि अब आप बेटी बचाओं का काम शुरू कर दें। राहुल ने कहा कि बीजेपी के इस रवैये से देश पूरी तरह से बेहाल हो चुका है, ऐसे में अब इंसाफ की जरूरत है।

राहुल की छापेमार राजनीति

राहुल के इस प्रदर्शन को छापेमारी की तरह देखा जा रहा है। जी हां, राहुल ने इसे सिर्फ एक ट्वीट के बाद अंजाम दिया, जिसकी वजह से ये पूरी तरह से सफल माना जा रहा है। हालांकि, राहुल गांधी और प्रियंका के जाने के बाद कांग्रेसी भी वहां से चले गये।

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