सिर्फ अप्रोच ब्रिज नहीं बल्कि जनता तक का अप्रोच भी टूटा है नीतीश बाबू

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सत्ता और सियासत के बीच बना पुल बिहार में टूट गया । विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का पुल कहा तो सरकार ने कहा “Approach Bridge” मतलब पहुंच पथ । गोपालगंज में गण्डक नदी में बढ़े हुए जलस्तर ने जनता और सरकार के बीच के सिर्फ पुल को ही नहीं, जनता के अप्रोच को भी खत्म कर दिया है । जनता विकास वादों की राह देख रही थी कि पुल बह गया और मंत्री जी का बयान आया कि बाढ़ में तो बहबे करता है । नियति को टालने के लिए ही तो सरकार चुनी थी जनता ने, ऐसे बयान सरकार के खड़े हाथ दिखाते है ।

 

बात करने को बहुत कुछ है । कहने को भी पुरी किताब है, और इल्जाम के सारे प्रबंध है दस्तावेजों के साथ । पर सवाल बस यही है कि क्या सरकार सुनेगी? सुनना होता तो 2 महीने पहले सुन चुकी होती जब नेपाल ने बांध बनाने से रोक दिया था । आम आदमी को 2 महीने से पता है कि नेपाल पानी छोड़ेगा, सरकार को कैसे नहीं पता । NDA के प्रवक्ता कहते है कि नेपाल ने पानी छोड़ दिया तो हम क्या करें ? नहीं कुछ कर सकते तो कुर्सी छोड़िए महाराज, अगर मुसीबत टाल नहीं सकते तो उसके जद में आने वाले लोगो के नुकसान भरपाई का तो इंतेजाम कीजिये । यूँ हाथ खड़े करने के लिए थोड़े ही न चुना गया है आपको लोकतंत्र में ।

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प्रतीक चित्र

ये स्थिति अचानक पनपी होती तो भी समझ आता है कि आप मजबूर है या विवश है । बाढ़ तो हर साल आ जाता है । 15 साल में आपसे नदियों में बढ़ने वाले जलस्तर को रोकने का, उनकी धाराओं को बांटने का प्रबंध ना हो सका ? योजनाएं कहाँ थी आपकी । पटना और कुछ बड़े शहरों के सौंदर्यीकरण को छोड़ कर और सड़कों का थोड़ा बहुत उत्तम जाल बिछाने के अलावा आपने किया क्या है पिछले 15 साल में, इसका ब्यौरा तो जनता मांगेगी ही । अब उसके बदले सुशील मोदी 20 साल पुरानी सरकार से वर्तमान स्थिति का हिसाब मांगे तो मांगे, इसपे अब क्या ही टिप्पणी किया जाए । उपमुख्यमंत्री मंत्री के पद पर बैठे जिस व्याक्ति को अभी बाढ़ और महामारी के दौर में अस्पतालों और क्षेत्रों का दौरा करने चाहिए था, वो अखबारों में लिखे अपने ही लेखों को खुद ही शेयर कर के ट्विटर पर वाह कर रहें है, इस आत्ममुग्धता पर कुछ कहना भी शर्मसार करता है । जवाब में पटना बाढ़ के समय बोरिया बिस्तर समेट भागते उनकी हॉफ पैंट वाली फ़ोटो ही देख लीजिए, इससे बेहतर नहीं लिखा जा सकता बिहार की दुर्व्यस्था पर ।

विपक्ष हमलावर है । विपक्ष बसें दे रहा है । विपक्ष चुनाव रोक कर पहले लोगो की जान बचाने की सलाह दे रहा है लेकिन बिहार के विकास पुरुष कहे जाने वाले लोग प्रचार और इश्तेहार में मशगूल है । सरकार को शायद अहंकार है कि उनका कोई विकल्प नहीं है, तो उन्हें याद रखना चाहिए, बदहाली के लिए विकल्प नहीं तलाशा जाता ।बाकी जनता मालिक…

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