डीयू छात्रसंघ चुनाव 2018: ABVP ने 26 लाख रूपये मे से 22 लाख रूपया चाय-नाश्ते पर खर्च कर दिये – फैराज खान

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डीयू छात्रसंघ चुनाव 2018:

मेट्रो पास में रियायत, नए महाविद्यालय बनवायेंगे, छात्रावासों का निर्माण किया जायेगा, यू- स्पेशल बस तथा बस पास काउंटर की संख्या बढ़ायेंगे, जाति, धर्म, रंग और क्षेत्र के नाम पर किसी छात्र के साथ छेड़छाड़ न हो इसके लिए कैम्पस की सुरक्षा पुख्ता की जायेगी, पीजी में रह रहे छात्र से मनमानी रेन्ट न वसूला जाये, इस पर नियम बनाये जायेंगे। क्लासेज की व्यवस्था सुदृंढ़ की जायेगी।

छात्रसंघ चुनाव आते ही इस तरह के अनेकानेक वादे सोशल मीडिया फेसबुक, टिवटर एंव व्हाटस्एप्प पर तैरने लगती है। वादो से गुदे पम्पलेट की बारिस से पूरा कैम्पस और रास्ते भर जाती है। रैलियों की आवाज आसमान चीर रही होती हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये आँधी भी समाप्त हो जाती है। और साल भर छात्र अपने माँगों के लिए तरह तरह के तिकड़म जैसे- धरना, रैली करते रहते हैं। हाथ क्या आता है प्रशासन का डण्डा और रह जाती है वाद न पूरा होने की कसक।

हम बात कर रहे हैं देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव की। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव- 2018 की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। सभी पार्टियाँ अपने- अपने गाजेबाजे के साथ छात्रों को लुभाने में कसर नही छोड़ रही है।

एबीवीपी, एनएसयूआई और सीवाईएसएस तीन प्रमुख पार्टियाँ हैं जिनमें टक्कर है। ये अलग बात है कि मफलर अपनी खाँसी की दवा के लिए लाल दवा का सहारा ले रही है। हम बात कर रहे हैं सीवाईएसएस और आइसा के गठजोड़ की। खबर है कि इस बार ये दोनों पार्टियाँ एक साथ चुनाव में उतर रही है। खबर के अनुसार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर आइसा के उम्मीदवार होगें और बाकि दो पदों पर सीवाईएसएस के उम्मीदवार।

अपने-अपने छात्र विंग के समर्थन में पार्टी के शीर्ष नेता भी उतर गये हैं। एक तरफ जहाँ केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने डीयू को एडहाक से मुक्त करने की बात कह कर छात्रो का ध्यान एबीवीपी की तरफ खींचने की कोशिश की है। वहीं दुसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने ऐलान किया कि अगर हमारे गठबंधन की छात्रविंग चुनाव जीतती है। तो पूरे कैम्पस को सीसीटीवी से लैस किया जायेगा।

राजनीति की बात हो और आरोप प्रत्यारोप की बात न हो, ऐसा कैसे सम्भव है। दिल्ली आइसा की अध्यक्ष कवलप्रीति कौर ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कैम्पस में अराजकता का माहौल है। अगर हम चुनाव जीतेंगे तो इन परिस्थितियों में बदलाव करेंगे। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फैराज खान ने एबीवीपी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। फराज ने कहा कि 2016- 17 में मौजूद छात्रसंघ (एबीवीपी) को मिले 26 लाख रूपये में से 22 लाख रूपया चाय- नाश्ते और विविध रूप में खर्च कर दिये थे। जबकि 2017- 2018 में एनएसयूआई को मिले 26 लाख में महज 22 रूपये चाय पर खर्च किये। छात्रों के एक- एक पैसे का विवरण  वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसी साफ- सुथारी छवि के काऱण हम दुबारा चुनाव जीतेंगे।

हम आप को बता दें कि विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव- 2018 के लिए वोटिंग 12 सितम्बर को होना है। नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 4 सितम्बर  नामांकन की आखिरी तारीख है।

ऐसे में कैम्पस के गलियारों में कई तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। कयास है क्या आइसा और सीवाईएसएस की गठजोड़ कोई करिश्मा कर पायेगी। क्या एबीवीपी वापसी करने में कामयाब हो पायेगी या एनएसयूआई फिर कोई करिश्मा करेगी। इन सब सवालों के बीच एक सवाल क्या छात्रों से किये वादे पूरे होगें या हर बार की तरह इस बार भी सबकुछ चुनावी ही साबित होगा।

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