योगी जी…भ्रष्टाचार के और कितने सबूत चाहिए आपको अब?

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योगी जी

उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी जिस मुद्दे को लेकर आई थी, आज वही मुद्दा बीजेपी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। पीएम मोदी का यूपी चुनाव प्रचार के दौरान कहना है कि यूपी को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएंगे, लेकिन बीजेपी की सरकार बनने के बाद भी भ्रष्टाचार से सरकार पूरी तरह से लिप्त नजर आ रही है। पर सवाल ये खड़ा होता है कि योगी सरकार इस मुद्दे पर खामोश है। चलिए जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

चलिए अब आपको उन कुछ खबरों से रूबरू कराते हैं, जिसको जानने के बाद आप भी कहेंगे कि योगी जी को न जाने अब और कितने सबूत चाहिए, तब जाकर वो भ्रष्टाचार पर बात करेंगे? यहां एक बात साफ करे दे कि बीजेपी नेेता इस बात को नकारते हुए ये कहते हैं कि यूपी में भ्रष्टाचार खत्म हो चुका है!

1.वाराणसी हादसा

योगी जी

वाराणसी में कैंट स्टेशन को लहरतारा से जोड़ने के लिए एक फ्लाईओवर बन रहा है, जिसके नीचे लंबा ट्रैफिक जाम है। तभी अचानक से बन रहे पुल का एक हिस्सा लोगों पर गिर जाता है, जिसमें 18 लोगों की जान चली जाती है। 50 से ज्यादा लोग मलबे में दब जाते हैं। मुख्यमंत्री जी दुख प्रकट करते हैं। स्थानीय विधायक कैलाश सोनकर मीडिया से रूबरू होकर कहते हैं कि ये सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से हुआ। मृतक के परिवारों को 5 5 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया गया।

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2.ओमप्रकाश राजभर

यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर अपनी ही सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए नजर आते हैं। लेकिन सरकार इसको ऐसे अनदेखी करती है, जैसे मानो कुछ हुआ ही नहीं है। राजभर यूपी बीजेपी के सहयोगी हैं, जिन्हें कैबिनेट में मंत्री का दर्जा दिया गया है। बता दें कि इनके कार्यकर्ताओं ने स्टिंग ऑपरेशन किए और कहा कि यूपी के थानों में भ्रष्टाचार हो रहा है। साथ ही राजभर ने ये भी कहा कि उन्होंने इस बारे में अमित शाह से भी बात की, लेकिन अभी तक इस मामलें में चुप्पी साधना कहीं न कहीं बीजेपी के कथनी और करनी पर सवाल उठा रहा है।

3.आगरा में भ्रष्टाचार

योगी जी

आगरा की उत्तरी विधासभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं जगन गर्ग। इन्होंने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखकर कहा कि आगरा निगम के अधिकारी 57 फीसदी तक कमीशन लेते हैं। बता दें कि जगन गर्ग ने इसके लिए एक लिस्ट भी जारी की है, जिसमें उन अधिकारियों के नाम है, जो कमीशन लेते हैं। विधायक का कहना है कि बीजेपी एक तरफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ रही है, तो दूसरी तरफ ये अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं।

आप इसे पढ़कर भूल जाएंगे….क्योंकि ऐसी खबरेंं तो रोजाना आप सुनते या पढ़ते हैं। लेकिन अगर इसकी गंभीरता को देखे तो ये यूपी सरकार के मुंह पर सीधे सीधे तमाचा जड़ती है। आलम ये है कि पीएम मोदी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में रहे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को कमीशन सरकार कहते हैं, लेकिन वो कभी यूपी की इन शिकायतों पर न तो बोलते हैं और न ही कोई एक्शन लेते हुए दिखाई देते हैं। जिसकी वजह से अब बीजेपी के ही मंत्री और विधायक अपनी सरकार के खिलाफ बोलने से नहीं चूकते हैं।

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