फिर सड़क पर उतरने के लिए स्‍टूडेंट्स मजबूर, सरकार के इस फैसले से हैं नाराज

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फिर सड़क पर उतरने के लिए स्‍टूडेंट्स मजबूर

केंद्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर से युवाओं ने मोर्चा खोला है। जी हां,पहले शिक्षा में हुए घोटालें को लेकर छात्रों को सड़क पर आना पड़ा तो अब एक बार फिर से युवा सरकार के एक फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नजर आ रहे हैं। इस बार लड़ाई पेपर लीक की नहीं है, बल्कि बजट की है। चलिए जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ इस बार टीचर्स भी सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। दरअसल, ये सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसमें सरकार ने 62 विश्वविद्यालयों को स्‍वायत्‍तता देने की घोषणा की है। छात्र और टीचर्स सरकार के इस फैसले से काफी आहत हैं, जिसकी वजह से उन्होंने मोर्चा खोल दिया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकार के इस तरह के फैसले की वजह से हम पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। ऐसे में उनकी मांग है कि सरकार इस फैसले को वापस लें। छात्रों में सरकार के इस फैसले को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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बताते चलें कि ऑल इ‍ंडिया स्‍टूडेंट्स एसोसिएशन और दिल्‍ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन मिलकर मंत्रालय से मांग कर रही हैं कि इन फैसलों को वापस लिया जाए, जिसके लिए वो हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं। याद दिला दें कि 20 मार्च को एचाआरडी मंत्रालय ने 62 विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने की घोषणा की, जिसके बाद से ही इस फैसले को वापस लेने की मांग की जा रही है।

छात्रों की जेब पर पड़ेगा असर

सरकार के इस फैसले से नाराज जेएनयू में आइसा की सचिव शशि का कहना है कि जेएनयू उन कुछ विश्वविद्यालयों में से एक है, जहां 500 रुपये सेमेस्‍टर खर्च में एक छात्र पढ़ाई कर लेता, ऐसे में अगर सरकार अपना ये फैसला वापस नहीं लेती है, तो छात्रों के बजट पर काफी असर पड़ेगा, फिर एक गरीब छात्र का पढ़ने जाएगा?

फिर सड़क पर उतरने के लिए स्‍टूडेंट्स मजबूर

फिलहाल, यह अभियान दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू में चल रहा है, जिसके बाद इस अभियान को जामिया औऱ आईपी में भी भेजा जाएगा, जिसके बाद इस पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए देश भर से युवाओं को इकठ्ठा किया जाएगा।

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