लव जिहाद पर सियासी फसाद?

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लव जिहाद का मामला साल 2009 में पहली बार केरल और फिर कर्नाटक में सामने आया. आरोप लगा कि,मुस्लिम युवक अपना धर्म छिपाकर पहले दूसरे धर्म की लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फांसते हैं और फिर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं.
केरल और कर्नाकट के बाद लव जिहाद के मामले में देश के दूसरे राज्यों में सामने आए. इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक टिप्पणी के बाद ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. कोर्ट ने कहा था कि महज शादी करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अवैध होगा. जिसके बाद कई राज्‍यों ने इसके खिलाफ सख्‍त कानून बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिया है.

कई राज्य कानून बनाने की तैयारी में

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक इस संबंध में कानून बनाने का एलान कर दिया है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने उपचुनाव के दौरान देवरिया में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए इसका खुले तौर ऐलान भी कर दिया. सीएम योगी ने सख्‍त लहजे में कहा था कि बहन, बेटियों की इज्‍जत के साथ खिलवाड़ करने वालों का अंत हो जाएगा. इसके साथ उन्‍होंने ये भी कहा केवल शादी करने के लिए धर्म को बदलना किसी भी सूरत में स्‍वीकार नहीं किया जाएगा और इस तरह के कृत्‍य को मान्‍यता दी नहीं दी जानी चाहिए. इसके बाद हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने इस तरह के मामलों पर कानून का मसौदा तैयार किए जाने की बात कही.


कई मालमों में लगे लव जिहाद के आरोप

लव जिहाद को लेकर पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं. हरियाणा के वल्लभगढ़ में छात्रा निकिता तोमर की हत्या को भी कथित लव जिहाद के तौर पर ही देखा गया. इसके बाद से ही कई राज्यों में लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. इसका मकसद लोभ, लालच, दबाव, धमकी या शादी का झांसा देकर शादी की घटनाओं को रोकना भी है.

क्या कहती हैं मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष

आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष और समाजसेवी शाइस्ता अम्बर ने लव जिहाद कानून बनाये जाने वाले बयान पर सख्त नाराजगी जताते हुए लव जिहाद कानून को संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ बताया. इसके साथ हि उन्होंने इस कानून के खिलाफ सवाल भी उठाते हुए कहा लव जिहाद कानून बनाकर सरकार क्या साबित करना चाहती है? उन्होंने कहा कि राजनीति की मर्यादाओं और भारत के संविधान तथा भारतीय संस्कृति की रक्षा और देश की सुरक्षा हम सब नागरिकों और सरकारों का कर्तव्य है. हमारे देश में नेता और बाकी लोग दूसरे धर्मों में शादी करते हैं तो क्या वह लव जिहाद माना जाएगा. किसी धर्म के नाम पर लव जिहाद कानून लाना संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ होने के साथ देश की साझी संस्कृति पर भी एक बड़ा हमला है, जो निंदनीय है.

लव जिहाद पर ओवैसी का आरोप

एआईएमआईएम  चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, अगर ऐसा है तो स्पेशल मैरिज एक्ट को भी खत्म कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने इस तरह के कानून को संविधान की धारा 14 और 21 के खिलाफ बताया. इसके साथ ही मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कानून की बात करने से पहले उन्हें संविधान को पढ़ना चाहिए. ओवैसी ने बीजेपी (BJP) पर युवाओं का बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठाने का आरोप भी लगाया.

शादी के लिए क्या धर्मांतरण जरूरी है ?

जस्टिस मित्तल बताते हैं कि भारत के संविधान अनुच्छेद 25 में व्यक्ति को धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है. इसका मतलब कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है. लेकिन कुछ समय पहले आए मामले चौंकाने वाले हैं. इसमें यह देखा जा रहा है कि कई ईसाई मिशनरी व अन्य लोग लालच देकर लोगों को षड्यंत्र करके, धोखे में रखकर धर्मांतरण के लिए उकसा रहे हैं. कुछ मामले ऐसे भी आते हैं जिनमें दो व्यक्ति, जो शादी करने वाले हैं, वह विभिन्न धर्मों के होते हैं. उसमें युवक या युवती केवल शादी करने के लिए धर्मांतरण करते हैं. यह कानूनी रूप से उचित नहीं है. इस बारे में उच्च न्यायालय ने भी हाल ही में एक निर्णय में स्पष्ट रूप से कहा है कि शादी करने के लिए किया गया धर्मांतरण पूरी तरह से अवैध है.

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